हालाँकि अंग्रेजी कैलेंडर भारत में बहुत अधिक प्रचलित है परन्तु आज भी भारत के त्योहारों और शादी ब्याह जैसे आयोजनों में भारत के प्राचीन प्रादेशिक कैलेंडर का ही प्रयोग होता है , जिनमें सबसे अधिक प्रचलित है विक्रमी संवत या विक्रम संवत। यह कैलेंडर ईसा से 57 वर्ष अधिक पुराना है , यानि की अभी अंग्रेजी कैलेंडर में 2019 चल रहा है तो इस कैलेंडर में 2076 चल रहा है। मान्यता के अनुसार , इसकी शरुआत उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा शकों और हूणों के हराने के बाद हुई थी।
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अंग्रेजी कैलेंडर जहाँ एक ओर सूर्य की गति पर आधारित है वहीं विक्रमी संवत चन्द्रमा की गति से निर्धारित होता है। चन्द्रमा की गति पर आधारित एक वर्ष (लगभग 354 दिन) , सूर्य की गति पर आधारित एक वर्ष (365 दिन) से थोड़ा छोटा होता है , इसीलिए विक्रमी संवत में सूर्य की गति से मिलान करने के लिए कुछ वर्ष पश्चात् एक मास जोड़ दिया जाता है जिसे अधिक मास कहते हैं। क्योंकि हमारे जीवन में मौसम (ऋतुओं) का प्रभाव सूर्य की गति से होता है , इसीलिए यह अधिक मास हिन्दू त्योहारों को , जो कि अधिकतर चंद्र गति पर आधारित है , हर वर्ष सामान मौसम (ऋतु) में रखने में सहायता करता है।
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अंग्रेजी कैलेंडर की भांति इस कैलेंडर में भी 12 मास (महीने) होते हैं। हर मास दो पक्षों में बटा होता है , शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा अपनी बढ़ती हुई कलाओं में होता है जबकि कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा अपनी घटती हुई कलाओं में होता है। हिन्दुओं के सभी शुभ कार्य जैसे शादी ब्याह शुक्ल पक्ष में ही किये जाते है तथा दीपावली को छोड़ कर लगभग सभी त्यौहार भी इसी पक्ष में आते हैं। कृष्ण पक्ष को अशुभ माना जाता है अवं नये कार्यों के शुभारम्भ से लिए कृष्ण पक्ष से बचा जाता है।
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पूर्ण चंद्र को पूर्णिमा कहा जाता है और जिस दिन चन्द्रमा घटते घटते लुप्त हो जाता है उसे अमावस्या कहा जाता है। अमावस्या के दिन लोग अपने पितरों को भोजन कराते हैं जो की भोजन को अग्नि को समर्पित करके एवं गाय या ब्राह्मण को खिला कर किया जाता है। श्राद्ध भी इसी पक्ष में आते हैं।
विक्रमी संवत में वर्ष की शुरुआत का दिन अलग अलग प्रदेशों में अलग है। कहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वर्ष से शुरुआत मानी जाती है जो कि चैत्र मास का पहला दिन होता है तो कहीं बैसाखी वाला दिन वर्ष की शुरुआत माना जाता है।
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विक्रमी संवत में महीनों के नाम इस प्रकार हैं।
चैत्र (चैत) - Chaitra
वैशाख बैसाख) - Vaishakha / Vaisakha
ज्येष्ठ (जेठ) - Jyeshtha
आषाढ़ - Ashada
श्रावण (सावन) - Shravana / Savana
भाद्रपद (भादों) - Bhadrapada / Bhado
आश्विन (क्वार) - Ashwina
कार्तिक - Kartika
मार्गशीर्ष (अग्राह्याना) - Margashirsha / Agrahayana
पौष - Pausha
माघ - Magha
फाल्गुन - Phalguna
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