मित्रो , एक बार एक महात्मा जापान देश की यात्रा पर गए। वहाँ उन्होंने एक दुकान से फल ख़रीदे। फल खरीदते समय उन्होंने महसूस किया की एक बालक उनकी गतिविधियों को ध्यान पूर्वक देख रहा है। उन्होंने इस बात को एक बालक का एक विदेशी के प्रति कौतूहल जान कर नजरअंदाज कर दिया। जब वे महात्मा दुकानदार से फल लेकर और फल का मूल्य चुका कर मुड़े , वह बालक उनके समक्ष आया और उसने उन्हें जापानी तरीके के अभिवादन किया। अभिवादन के प्रत्युत्तर में महात्मा ने भी अभिवादन किया और यह जानने के लिए उत्सुक हुए की वह बालक उनसे क्या कहना चाहता है।
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तभी बालक ने उनसे प्रश्न किया "श्रीमान , यह फल आपने कितना मूल्य चूका कर ख़रीदे हैं?" महात्मा ने कुछ सोचते हुए उसे मूल्य बता दिया। किन्तु वे यह समझने में असमर्थ थे कि वह बालक उनसे ऐसा क्यों पूछ रहा है। वे यह सोच ही रहे थे कि तभी उस जापानी बालक ने अपनी जेब में हाथ डाला और कुछ जापानी मुद्रा निकालकर महात्मा की ओर बढ़ाते हुए बोला की "आप यह मूल्य ले लीजिये और फल मुझे दे दीजिये।" महात्मा कुछ क्षण के लिए सोच में पड़ गए और उन्होंने अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए बालक से पूछा कि वह ऐसा क्यों कह रहा है। बालक ने तुरंत उत्तर दिया कि दुकानदार ने जो फल उन्हें बेचे हैं वे सड़े गले है और इन्हें खाकर महात्मा अवश्य ही जापान के बारे में गलत विचार बनाएँगे और जब किसी और देश में जाकर महात्मा यह अनुभव सुनाएंगे तो उसके देश जापान की छवि ख़राब होगी, इसीलिए वह मूल्य चुकाकर महात्मा से वे फल ले रहा है । महात्मा यह उत्तर सुनकर आश्चर्यचकित रह गए। उन्हें इतने छोटे बालक से इस बात की आशा ना थी। उन्होंने बालक को पैसे वापस उसकी जेब में रखने को कहा तथा उन्होंने बालक को आश्वस्त किया की वे इस सड़े फल खरीदने वाले अनुभव का जिक्र कहीं नहीं करेंगे।
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उनकी उस बालक से और बात करने की इच्छा हुई और बालक भी उनकी बातों का अच्छे प्रकार से उत्तर देने लगा। तब महात्मा ने बालक की देशभक्ति की एक और परीक्षा लेनी चाही। उन्होंने बालक से पूछा कि वह किस भगवान को मानता है। बालक ने महात्मा को अपने भगवान का नाम बताया । महात्मा ने पूछा की यदि वही भगवान जापान पर आक्रमण कर दें तो वह क्या करेगा ? तब बालक ने निःसंकोच उत्तर दिया , "मैं उनकी मूर्तियाँ पिघलाकर , उनकी गोलियाँ बनाकर उनको मारूंगा।" बालक का देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत यह उत्तर सुनकर महात्मा दंग रह गये। उन्होंने मन में सोचा कि जिस देश के बच्चे इतने देशभक्त हैं , उस देश का भला कोई क्या बिगाड़ सकता है।
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