हिंदी कहानी - साँप ने काटना छोड़ा है फुफकारना नहीं (Hindi Story - Snake Gave Up Bite But Not Hiss)

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एक बार एक महात्मा एक गांव में आये। गाँव के लोगों ने उनका बहुत स्वागत सत्कार किया। परन्तु महात्मा को गाँव वालों के चेहरों पर एक भय का भाव दिखाई दिया। जब महात्मा घूमते हुए गाँव की एक गली में प्रवेश करने लगे तो लोगों ने उन्हें रोका। महात्मा के कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि उस जगह एक सांप रहता है जो कि लोगों को डस लेता है। लोगों के मना करने के बाद भी महात्मा ने उस जगह जाकर साँप से मिलने का निश्चय किया।

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महात्मा को आया देख साँप ने उन्हें प्रणाम किया, उनकी कुशल क्षेम पूछी एवं उनको आसन प्रदान किया। महात्मा को साँप के व्यवहार में कुछ भी अनुचित नहीं लगा। तब उन्होंने साँप से पूछा कि उन्हें उसका व्यवहार बिल्कुल ठीक लगा , फिर गाँव वाले क्यों उससे इतना डरते हैं और वह उनको क्यों डस लेता है। साँप ने कहा कि , हे महात्मा , गाँव वाले मुझे मारने का प्रयत्न करते रहते हैं। अपनी आत्मरक्षा के लिए छोटे से छोटे खतरे को भांप कर आक्रमणकारी को डस लेना मेरा प्राकृतिक स्वभाव है। महात्मा साँप का आशय समझ गए। उन्होंने साँप को समझाया कि सभी मनुष्य आक्रमणकारी नहीं होते।  कुछ तो केवल उस राह से अपनी रोजमर्या की दिनचर्या के किये गुजर रहे होते हैं जिनको साँप काट (डस) लेता है। महात्मा ने साँप बताया कि मनुष्य एक पारिवारिक एवं सामाजिक प्राणी है और जो व्यक्ति साँप के काटने से मर जाता है , किस प्रकार उसके परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। साँप को समझ में आ गया और उसने कभी भी ना डसने (काटने) का निश्चय किया। महात्मा ने गाँव वालों को साँप के इस निश्चय के बारे में बताया तो वे बड़े प्रसन्न हुए। महात्मा गाँव वालों और साँप को आशीर्वाद देकर चले गए।

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छह महीने बाद वही महात्मा उस गाँव में दुबारा आए। उन्होंने साँप को बहुत ही दीन हीन अवस्था में पाया। वह जगह जगह से लहू लुहान हो चुका था। महात्मा ने इसका कारण पूछा तो साँप ने बताया कि उसने महात्मा की आज्ञा से गाँव बालों को काटना (डसना) छोड़ दिया है। परन्तु इसी कारण से गाँव वालों में साँप का भय समाप्त हो गया है और वह इस स्थिति का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। जैसे कि बच्चे साँप पर चढ़कर और कूदकर खेलते हैं। स्त्रियाँ साँप को रस्सी की तरह प्रयोग करके कुँए से पानी निकालती हैं या साँप को रस्सी की तरह बांधकर उसपर कपड़े सुखाती हैं।

महात्मा साँप की दयनीय स्तिथि समझ गए और उन्होंने साँप से कहा कि, "मित्र मैंने तुम्हें काटना या डसना छोड़ने की सलाह दी है , फुफकारना छोड़ने की नहीं। तुमने फुफकारना भी छोड़ दिया , इसीलिए लोगों ने तुम्हारा अनुचित लाभ उठाना शुरू कर दिया। " साँप को बात समझ में आ गयी और उसने उसका अनुचित लाभ उठाने वालों पर फुफकारना शुरू कर दिया और उस दिन के बाद गाँव वाले और साँप दोनों अपनी अपनी मर्यादा में सुख से रहने लगे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें इतना भी नहीं झुकना चाहिए कि दुनिया हमारा अनुचित लाभ उठाने लगे।

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