वैसे तो यदि भारत की अच्छी बातों की एक बहुत लम्बी सूची तैयार की जा सकती है , पर मैंने मेरे अनुसार , जो मुझे भारत के बारे में सबसे अच्छी और विशेष 10 बातें लगीं , उनका संकलन इस ब्लॉग पोस्ट में आपके लिए प्रस्तुत किया है। यदि आपको लगता है कि कुछ वर्णनीय मैंने छोड़ दिया है तो , आप से अनुरोध है , मुझे कमेंट में लिख कर जरूर बताएं और आपको मेरा यह संकलन कैसा लगा यह भी अवश्य बताएं।
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है ,
वह नर नहीं नर पशु निरा है , और मृतक के समान है।
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यहाँ तक कि अंग्रेजी शब्द Geometry और Trigonometry भी हिंदी शब्द ज्यामिति और त्रिकोणमिति से बने हैं।
आज ज्यादातर भारतीयों को यह नहीं पढ़ाया जाता की जो गिनती वो अंग्रेजी भाषा में स्कूलों में वन , टू , थ्री , फोर करके पढ़ते हैं , उनका जन्मदाता देश उनका देश भारत ही है , क्योंकि यह बात उनको उनकी किताबें नहीं बतातीं। पर यह एक सच्चाई है कि 1 ,2 , 3 , 4 ...... को दुनिया को हमने ही सिखाया। जिन लोगों को अभी भी भरोसा नहीं है और जिनको अंग्रेजों की बताई बात ही सही लगती है , वो अंग्रेजों के बनाये इंटरनेट पर अंग्रेजी गूगल पर अंग्रेजी वेब्सीटों पर चैक कर सकते हैं। उनको यह देखकर और भी सदमा लग सकता है कि इनको आज भी हिन्दू - अरेबिक नुमेरल्स (Hindu–Arabic numeral system or Indo-Arabic numeral system) कहा जाता है। खैर जिनको अपने देश पर घमंड नहीं है उनको छोड़ देते है और उनसे बात करते है जिनको इस बात पर भरोसा है। यदि आप सरसरी तौर पर देखेंगे तो पाएंगे की हिंदी और अंग्रेजी की गिनती के जीरो , एक ,दो , तीन और दस तो अंग्रेजों बिलकुल ही कॉपी और पेस्ट कर डाले।
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एक बार सोचो , जहां पश्चिमी देश छोटी छोटी खोज को दुनिया से साँझा करने की अरबों खरबों डॉलर रॉयल्टी मांगते हैं , वहीं यदि भारत ने दुनिया से सिर्फ अपनी गिनती, शून्य और योग इस्तेमाल करने की रॉयल्टी मांग ली तो शायद दुनिया कंगाल हो जाएगी।
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मित्रो , यदि आपके पास भारतीय धर्म एवं संस्कृति के बारे में कुछ उपयोगी जानकारी है जो आप इस ब्लॉग पर प्रकाशित करना चाहते हैं तो मुझे rekhashar76@gmail.com पर बताएं। Friend, if you have any useful knowledge on Indian Religion and Culture which you wish to publish at this blog, then please let me know at rekhashar76@gmail.com
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है ,
वह नर नहीं नर पशु निरा है , और मृतक के समान है।
1. भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया (India never attacked any country)
जी हाँ मित्रों , कितनी सरल ही बात है , आपकी पता भी थी पर आपने अपने देश की इस विशेषता की ओर कभी ध्यान नहीं दिया। भारत की यह विशेषता इसलिए बही क्योंकि भारत को कभी इसकी आवश्यकता ही नहीं पड़ी। इतिहास में एक सभ्यता ने दूसरी सभ्यता के ऊपर अधिकतर आक्रमण या तो लूटपाट के उद्देश्यों से या जमीन हड़पने के उद्देश्यों से किये गए हैं। भारत को दोनों की ही जरुरत नहीं थी। भारत के पास तो इतना धन था की भारत तो खुद तो सोने की चिड़िया कहलाता था और जमीन के लिहाज से तो आज का राजनितिक भारत अभी भी दुनिया का सातवां बड़ा देश है , और यदि इसमें से अलग हुए देश इसमें जोड़ दिए जाएं तो यह और बड़ा हो जायेगा। तो मित्रों भारत को किसी पर आक्रमण की आवश्यकता ही नहीं थी , बल्कि भारत के ऊपर जितने लुटेरों के आक्रमण हुए है , शायद ही दुनिया के किसी देश पर हुए हों। अब कुछ लोग कहेंगे क्या राम जी ने लंका पर आक्रमण नहीं किया था , क्या 1971 ने भारत ने पूर्वी पाकिस्तान पर आक्रमण नहीं किया था तो मेरे भाई , भारत से मेरा मतलब है भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों ने कभी भारतीय उपमहाद्वीप के बहार आक्रमण या अतिक्रमण नहीं किया। अब तो ठीक है ना।शायद आप पढ़ना चाहें : हिंदी कविता - क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो (Hindi Poem - Shama Shobti us Bhujang Ko, Jiske Pas Garal Ho)
2. भारत ने विश्व विजेता सिकंदर को हराया था (India defeated the Alexander)
वैसे तो सिकंदर विश्व विजेता था ही नहीं। यूनान से चलकर भारत की सीमा तक आ जाने को विश्व नहीं कहते। पर यदि एक मिनट के लिए उस समय उलब्ध संसाधनों की मदद से एक सेना को लेकर यूनान से भारत की सीमा तक आने को विश्व मान भी लें तो भी सत्य यही है की उस विश्व विजेता सिकंदर को भारत एक छोटे से राज्य के राजा पोरस ने , जिसका राज्य भारत के नक़्शे पर एक बिंदु से बड़ा नहीं था , उसने बैरंग डाक की तरह लौटाया था। बहुत सारे लोगों को मेरी बात कि पोरस ने सिकंदर को हराया था , हजम नहीं हुई होगी। ये वो लोग हैं जो अंग्रेजों के लिखे भारतीय इतिहास को ही सही मानते हैं। ऐसे लोगों के वैसे तो समझाने का कोई फायदा नहीं है , पर फिर भी हम एक पोस्ट अलग से लिखेंगे , जिसमें कुछ तर्कों के माध्यम से उनको समझाने का प्रयास करेंगे कि कैसे सिकंदर ने पोरस को नहीं बल्कि पोरस ने सिकंदर को हराया था । उस पोस्ट का लिंक यहाँ अवश्य पेस्ट करेंगे। (लीजिये लिक ये रहा : क्या वास्तव में सिकंदर ने पोरस को हराया था ? (Did really Alexander defeated Porus?) वैसे भारत में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो यदि पूछ लिया जाये कि तक्षशिला कहाँ पर था तो वो उसे बिहार में बातएंगे क्योंकि वो तक्षशिला और नालंदा में फर्क नहीं कर पाएंगे और यदि पूछ लिया जाये कि कालिदास कौन था तो वो बोलेंगे की शायद अकबर का नवरतन होगा। ऐसे लोगों ने अंग्रेजी इतिहास पढ़ लिया , यही गनीमत है। वैसे भी भारत को बाहरी लोगों ने नहीं , बल्कि घर के लोगों ने ही हराया है। जालियां वाला बाग में जिन लोगों ने गोलियां चलाई वो हाथ भारतीय थे। रानी लक्ष्मी बाई पर जिन हाथों ने तलवारें चलाई वो अधिकतर हाथ भारतीय थे।शायद आप पढ़ना चाहें : हिंदी कहानी - साँप ने काटना छोड़ा है फुफकारना नहीं (Hindi Story - Snake Gave Up Bite But Not Hiss)
3. भारत ने शून्य की खोज की थी (India invented zero)
अब इससे तो कोई इंकार नहीं करेगा की भारतीयों ने शून्य यानि की जीरो की खोज की थी। जरा एक बार उन रोमन संख्याओं को याद करो जहाँ बीस लिखने के किये लिए X को दो बार लिखना पड़ता था और तीस लिखने के लिए X को तीन बार लिखना पड़ता था। सोचो कि क्या हाल होता गिनतियों का शून्य के बिना। तो मेरे मित्रो दुनिया को भारत ने ही सिखाया कि जिसकी वैल्यू कुछ नहीं होती , उस जीरो की वैल्यू बहुत होती है।यहाँ तक कि अंग्रेजी शब्द Geometry और Trigonometry भी हिंदी शब्द ज्यामिति और त्रिकोणमिति से बने हैं।
4. भारतीय गिनती पूरी दुनिया इस्तेमाल करती है (Indian counting system is used all over word)
आज ज्यादातर भारतीयों को यह नहीं पढ़ाया जाता की जो गिनती वो अंग्रेजी भाषा में स्कूलों में वन , टू , थ्री , फोर करके पढ़ते हैं , उनका जन्मदाता देश उनका देश भारत ही है , क्योंकि यह बात उनको उनकी किताबें नहीं बतातीं। पर यह एक सच्चाई है कि 1 ,2 , 3 , 4 ...... को दुनिया को हमने ही सिखाया। जिन लोगों को अभी भी भरोसा नहीं है और जिनको अंग्रेजों की बताई बात ही सही लगती है , वो अंग्रेजों के बनाये इंटरनेट पर अंग्रेजी गूगल पर अंग्रेजी वेब्सीटों पर चैक कर सकते हैं। उनको यह देखकर और भी सदमा लग सकता है कि इनको आज भी हिन्दू - अरेबिक नुमेरल्स (Hindu–Arabic numeral system or Indo-Arabic numeral system) कहा जाता है। खैर जिनको अपने देश पर घमंड नहीं है उनको छोड़ देते है और उनसे बात करते है जिनको इस बात पर भरोसा है। यदि आप सरसरी तौर पर देखेंगे तो पाएंगे की हिंदी और अंग्रेजी की गिनती के जीरो , एक ,दो , तीन और दस तो अंग्रेजों बिलकुल ही कॉपी और पेस्ट कर डाले।
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5. भारत ने दुनिया को मसाले दिए (India gave spices to the world)
जरा सोचें , यदि भारत ने दुनिया को मसाले ना दिए होते तो आज दुनिया का खाना कितना बेस्वाद होता। ये भारत के मसाले ही थे जो अंग्रेजों को भारत तक खींच लाये। ये भारत के मसाले ही थे , जिनके लिए कोलंबस चला तो भारत की ओर नया समुंद्री मार्ग ढूंढने था पर मिल गया उसे अमरीका। देखी भारतीय मसालों की शक्ति , एक पूरा महाद्वीप ही मिल गया। आज भारत के मसालों की खुशबू पूरी दुनिया में महक रही है। क्या है दुनिया के पास हमारे मसालों को छोड़कर एक भी ऐसी चीज जो पूरी दुनिया को महका सके।6. भारत ने दुनिया को योग दिया (India gave Yoga to the world)
आज भारत के योग का लोहा पूरी दुनिया मान चुकी है। आज दुनिया को स्वस्थ रखने में योग का अभूतपूर्व योगदान है। भारत की यह प्राचीन पद्यति पूरे विश्व में लोकप्रिय हो चुकी है। सबसे बड़ी बात है की योग की यह स्वीकार्यता सहज है , इसमें भारत सरकार की ओर से इसको लोकप्रिय करने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाये जैसे कि पश्चिमी देश अपने उत्पादों को लोकप्रिय करने के लिए साम , दाम , दंड , भेद सभी तकनीकों का प्रयोग करते हैं। योग ने सभी धार्मिक सीमाओं को भी तोड़ दिया है। लगभग सभी धर्मों के लोगों ने इसे स्वस्थ रहने के लिए उत्तम अभ्यास माना है।शायद आप पढ़ना चाहें : हिंदी कैलेंडर विक्रमी संवत (Hindi Calendar Vikrami Samvat)
7. भारत ने दुनिया को भगवान बुद्ध दिए (India gave Buddha to the world)
आज से लगभग 2300 साल पहले जब विश्व विजेता सिकंदर खून की नदियाँ बहाता भारत की ओर बढ़ रहा था , ठीक उसके कुछ दशकों बाद भारत भी निकला विश्व विजय के लिए , लेकिन तलवार लेकर नहीं , बल्कि भगवान बुद्ध के विचार लेकर। जहाँ आज सिकंदर का साम्राज्य कहीं नहीं है , वहीं भगवान बुद्ध के विचार बुद्ध धर्म के रूप में कई देशों में ज्ञान का फैला रहे हैं। 1879 में प्रकाशित सर एडविन अर्नोल्ड की किताब में , उसने भगवान बुद्ध को एशिया का प्रकाश स्तंभ यानि की (Light of Asia) कहा है।शायद आप पढ़ना चाहें : भगवान बुद्ध (Lord Buddha)
8. भारत ने दुनिया को फिर अहिंसा का पाठ पढ़ाया (India taught Non-Violence to the world)
बीसवीं सदी में दुनिया जब विश्व युद्धों में उलझी हुई थी और कई देशों को सिर्फ युद्ध ही हर समस्या का हल दिख रहा था , तब एक बार फिर भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दुनिया का दिखा दिया कि अहिंसा से भी वह सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है जिसे उस समय की दुनिया की महाशक्तियां बन्दूक में ढूंढ रही थी। जिस ब्रिटिश राज के बारे में ऐसा कहा जाता था की उसका सूर्य कभी अस्त नहीं हो सकता , एक आदमी ने बिना किसी अस्त्र शस्त्र के अस्त कर दिया। दुनिया देखती रह गयी कि किस तरह बिना कोई गोली चले एक गुलाम देश की निहत्थी जनता से , एक समृद्ध देश की उन्नत सरकार हार गयी।शायद आप पढ़ना चाहें : हिंदी कविता - माँ कह एक कहानी (Hindi Poem - Ma Keh Ek Kahani)
9. भारत ने दुनिया को बताया कि पेड़ पौधों में जीवन है (India told the world that plants have life)
बीसवीं सदी तक जब सारी दुनिया यह मानती थी कि पेड़ पौधे निर्जीव होते है , तब भारत के जगदीश चंद्र बसु ने अपने बनाये हुए क्रेस्को ग्राफ (Crescograph) यन्त्र से दुनिया को यह दिखा दिया की पेड़ पौधे भी हमारी तरह जीवित होते है , साँस लेते हैं तथा अपने आस पास के वातावरण के प्रति संवेदनशील होते हैं। जरा सोचिये , जहाँ समृद्ध देशों के वैज्ञानिक , जिनके पास अपने समय की एक से बढ़कर एक तकनीक थी , जब उनके दिमाग में यह विचार नहीं आया तो , एक जगदीश चंद्र बसु के दिमाग में यह आईडिया कैसे आया। शायद इसका राज छुपा है हमारी संस्कृति में जिसमें जानवरों और पेड़ पौधों को भी उतना ही पवित्र मानकर उनकी पूजा की जाती है जितनी कि भगवान को। पीपल और तुलसी की पूजा होते तो आपने अवश्य देखी होगी। थोड़ा दिमाग पर जोर डालें तो हमें यह भी याद आ जाएगा कि हमारे बड़े बूढ़े हमें रात में पौधों में पानी देने से क्यों रोकते थे और कहते थे कि रात को पौधे सो रहे होते हैं , इसलिए रात में पौधों को पानी नहीं देना चाहिए और किस प्रकार जब सीता माता को रावण उठा ले गया था , तब कैसे रामचंद्र जी ने व्यथित होते हुए पेड़ों से उनका पता पूछा था। यदि राम जी थोड़ा भी दक्षिण की बजाये उत्तर की ओर ढूंढते हुए चले गए होते तो जटायु और हनुमान जी से उनकी भेंट कभी नहीं हुई होती।शायद आप पढ़ना चाहें : हिंदी कविता - कदंब का पेड़ (Hindi Poem - Kadamb Ka Ped)
10. भारत ने दुनिया को बताया कि चन्द्रमा पर पानी है (India told world that Moon has water)
इक्कीसवीं सदी में भी भारत का योगदान दुनिया के लिए जारी है। ज्यादातर हिन्दुस्तानियों को यह नहीं पता कि हमारे भारत के चंद्रयान 1 ने चन्द्रमा पर पानी की खोज की थी। ऐसा इसलिए क्योंकि हम अपनी ही उपलब्धियों को कम करे आंकते हैं। यदि यह खोज कहीं पश्चिम में हुई होती तो अब तक हमारे स्कूल के बच्चों की किताबों में एक चैप्टर (अध्याय) बन कर आ चुकी होती और सब हिन्दुस्तानियों को पता होती , परन्तु क्योंकि खोज भारत ने की है इसीलिए न तो पश्चिमी मीडिया कुछ बोलेगा ना ही हम कुछ कहेंगे। आलम यह है कि अगर गलती से आपको यह बात पता है कि चन्द्रमा पर पानी की खोज भारत के चंद्रयान 1 ने की थी और अगर आप किसी को बताएंगे तो वो आपको ऐसे देखेगा जैसे आपने उसको मनोहर कहानियां का कोई किस्सा सुना दिया हो और बाकी उसकी शक्ल बता देगी कि उसने आप की बात पर कोई विश्वास नहीं किया है।एक बार सोचो , जहां पश्चिमी देश छोटी छोटी खोज को दुनिया से साँझा करने की अरबों खरबों डॉलर रॉयल्टी मांगते हैं , वहीं यदि भारत ने दुनिया से सिर्फ अपनी गिनती, शून्य और योग इस्तेमाल करने की रॉयल्टी मांग ली तो शायद दुनिया कंगाल हो जाएगी।
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भगवान श्री कृष्ण के अनमोल वचन (Lord Shri Krishna Quotes)
हिन्दू धर्म की 10 विशेषताएं (10 Unique Things About Hinduism)
हिंदी एवं संस्कृत के कथन जो भारतीय संस्कृति तो दर्शाते हैं (Quotes in Hindi and Sanskrit Showing Values of Indian Culture)
हिंदी कहानी - मूर्ति में भगवान दिखाई देना (Hindi Story - To see God in statue)
मित्रो , यदि आपके पास भारतीय धर्म एवं संस्कृति के बारे में कुछ उपयोगी जानकारी है जो आप इस ब्लॉग पर प्रकाशित करना चाहते हैं तो मुझे rekhashar76@gmail.com पर बताएं। Friend, if you have any useful knowledge on Indian Religion and Culture which you wish to publish at this blog, then please let me know at rekhashar76@gmail.com

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