अकबर बीरबल और अंधों की सूची
एक बार बादशाह अकबर को वैसे ही ख्याल आया कि क्यों ना राज्य में जितने अंधे हैं उनकी एक सूची तैयार की जाये। बस ख्याल आते ही बुला भेजा गया बीरबल को। अकबर का ख्याल सुनते ही बीरबल का सिर घूम गया। ये कैसा काम है , बादशाह ऐसा क्यों करना चाहते हैं , वो सोच में पड़ गए । उसे असमंजस में देख कर बादशाह उसकी स्तिथि भांप गए। यही मौका है बीरबल को थोड़ा परेशान करते हैं , देखते हैं बीरबल इस काम में अपनी अक्ल के घोड़े कैसे दौड़ता है , मन ही मन सोचते हुए बादशाह अकबर मुस्कुराने लगे। तो बीरबल हमें इस काम के लिए तुमसे उपयुक्त कोई नहीं लगता , क्यों ना तुम ही इस काम को करो ? अव्वल तो बीरबल को काम का तथ्य ही समझ में नहीं आया और ऊपर से उनकी आशा के विपरीत उनको ही काम सौंप दिया गया , ये सब बातें बीरबल के चतुर दिमाग को आहात कर रहीं थीं। लेकिन थोड़ी ही देर में बीरबल समझ चुके थे कि यह सब बादशाह केवल उनको परेशान करने के लिए कर रहे हैं , अन्यथा यह काम तो वह किसी से भी करवा सकते थे। बस यह बात दिमाग में आते ही बीरबल ने बादशाह को सबक देने की सोची।अगले ही दिन बीरबल शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर मोची बनकर जूते गांठने बैठ गए। जो भी व्यक्ति वहां से गुजरता वही बीरबल को जूते बनाते देखकर हैरान रह जाता। जल्दी ही यह बात आग की तरह फैल गयी और बादशाह तक भी पहुंच गयी। यह सुनकर बादशाह को बहुत हैरानी हुई। वे तुरंत बीरबल से मिलने के लिए निकल पड़े। पहुंचकर जब बादशाह ने बीरबल को असलियत में मोची का काम करते देखा तो उनकी आखें फटी की फटी रह गयीं। उन्होंने तुरंत बीरबल से पूछा, "यह क्या कर रहे हो बीरबल "। बीरबल ने कुछ भी जवाब नहीं दिया बल्कि वो जूते बनाने में और तल्लीनता से लग गए। बादशाह को बीरबल का जवाब न देना बहुत अखरा और वो बीरबल को अगली सुबह दरबार में मिलने का आदेश देकर चले गए।
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अगली सुबह बीरबल नियत समय पर दरबार में उपस्थित थे। क्या हुआ बीरबल तुम कल जूते क्यों बना रहे थे, बादशाह ने कड़ककर बीरबल से पुछा, उन्हें कल बीरबल का उत्तर न देना अभी भी अखर रहा था। महाराज मैं आपके ही आदेश का पालन करते हुए अंधों की सूची बना रहा था , अब कोई अंधों की सूची घर में बैठकर तो नहीं बना सकता ना। चूँकि सूची बनाते बनाते मेरे पास काफी खाली समय था तो मैंने सोचा कि बैठे बैठे घर के सारे जूते ही ठीक कर लूँ। बादशाह समझ गए की जरूर इसमें भी बीरबल की कुछ चाल होगी , क्योंकि बिना कारण बीरबल कुछ नहीं करता। खैर मुझे क्या पड़ी है , मैं तो बीरबल से अंधों की सूची के बारे में पूछता हूँ। अकबर कुछ बोल पाते इससे पहले ही बीरबल ने अंधों की सूची बादशाह के सामने रख दी , लीजिये हुजूर आपकी अंधों की सूची भी तैयार है।
सूची देखते ही बादशाह का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा। वे आग बबूला हो उठे। ये क्या बीरबल इसमें तो सबसे ऊपर हमारा नाम है। क्या तुम्हें हमारी आंखें दिखाई नहीं देतीं। क्या तुम्हें पता नहीं कि हमें दिखाई देता है, अकबर ने अत्यंत क्रोध से बीरबल की ओर देखकर पूछा। सारी राजसभा यह जानकर दंग रह गयी कि बीरबल ने अंधों की सूची में सबसे ऊपर बादशाह का नाम रखा है। सब यही समझ रहे थे कि अब बीरबल को प्राणदंड मिलना तय है। बीरबल के विरोधी तो जैसे मन ही मन नाच रहे थे। गुस्ताखी माफ जहाँपनाह , बीरबल बोले , मुझे अच्छी तरह मालूम है कि आपकी आंखें हैं और आपको दिखाई देता है , किन्तु जब में कल जूते बना रहा था , तब आपने इन्हीं आँखों से देखते हुए मुझसे पूछा था कि मैं क्या कर रहा हूँ तो मुझे लगा कि शायद आप अंधे हो गए हैं और आपको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है , इसलिए मैंने आपका नाम इस सूची में दाल दिया। चूँकि आप अति विशिष्ठ व्यक्ति है तो मैंने आपका नाम आपको सम्मान देते हुए सबसे ऊपर लिखा है और बाकी सब विशिष्ठ दरबारी जिनको यह दिखाई नहीं दिया कि मैं क्या कर रहा हूँ , उनका आपके बाद। अकबर समझ गए कि बीरबल ने उनके नहले पर दहला मार दिया है।
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अकबर बीरबल और सबसे बड़ी जिद
एक बार बादशाह अकबर ने दरबारियों से पूछा की सबसे बड़ी जिद किसकी होती है। सभी दरबारी एक स्वर में बोले , जहाँपनाह आपकी , आप हमारे बादशाह हैं , भला आपसे बड़ी जिद किसकी हो सकती है। अकबर दरबारियों का जवाब सुनकर गद गद हो गए , परन्तु तभी उनकी नजर बीरबल पर पड़ी जो एक तरफ चुपचाप खड़े थे और ऐसा प्रतीत होता था की बीरबल शायद दरबारियों से सहमत नहीं हैं। बीरबल क्या तुम्हारी राय में किसी और की जिद हमारी जिद से बड़ी हो सकती है , अकबर ने पूछा। जी महाराज , मेरे ख्याल से हो सकती है , बीरबल बोले। सारे दरबारी बीरबल का जवाब सुनकर सकते में आ गए। सोचने लगे कि ये बीरबल हमेशा ही बादशाह की बातों में टांग क्यों अड़ाता है और फिर पता नहीं कैसे आखिर में अपनी बात सिद्ध भी कर देता है, खैर हमें क्या लेना देना। बीरबल , हम तुम्हारी बात से सहमत तो नहीं हैं , फिर भी बताओ तुम्हारे ख्याल से किस की जिद हमारी जिद से भी बड़ी हो सकती है, अकबर ने पूछा। छोटे बच्चे यानि की एक बालक की महाराज , बीरबल ने उत्तर दिया। हा , हा , हा , सुनकर अकबर बादशाह जोर जोर से ठहाका लगाने लगे। उनको देखकर बाकी दरबारी भी हँसने लगे। तो तुम कहना चाहते हो की बच्चे की जिद भी ऐसी हो सकती है कि उसको कोई पूरा न कर सके, स्वयं हम भी , अकबर ने पूछा। जी महाराज , बीरबल ने उत्तर दिया , आपने सही सुना , एक बच्चे की जिद को पूरा कर पाना आपके भी बस में नहीं है। यदि आप एक मौका दें तो मैं यह बात साबित कर सकता हूँ। ठीक है बीरबल , तुम जब चाहें अपनी बात सिद्ध कर सकते हो , अकबर ने कहा। जी महाराज , कह कर बीरबल चले गए।अगले दिन बीरबल दरबार में एक बच्चे के साथ उपस्थित थे जो कि उनका ही पोता था। सभी दरबारी बालक के साथ हंसी ठिठोली कर रहे थे। बादशाह अकबर भी दरबार में आ गए। दरबार में बीरबल के पोते को देखकर उनको बहुत अच्छा लगा। तो बीरबल तुम अपने पोते को लाये हो हमारी परीक्षा लेने के लिए की हम एक बालक की जिद पूरी कर सकते हैं कि नहीं, अकबर बोले। जी महाराज , बीरबल ने उत्तर दिया। अकबर ने बच्चे को गोद में उठा लिया और पूछा, "क्या खाओगे बेटे" । गन्ना , बच्चे ने तुरंत उत्तर दिया। तुरंत एक गन्ना मंगवाया गया और बच्चे को दिया गया। बच्चा जोर जोर से रोने लगा, मुझे छिला हुआ गन्ना चाहिए , बच्चे ने रोते रोते कहा। बादशाह के आदेश पर तुरंत गन्ने को छीला गया। बच्चा और जोर जोर से रोने लगा , मुझे तो गँडेरियाँ (गन्ने के दुकड़े) खाने हैं , बच्चे ने रोते रोते कहा। बादशाह के आदेश पर गन्ने की गँडेरियाँ भी बना दी गयीं। बालक और जोर जोर से रोने लगा। अब इसे क्या हो गया , बादशाह सोच में पद गए। अब और क्या चाहिए बेटे , बादशाह ने पूछा। मुझे साबुत गन्ना ही खाना है , बच्चे ने रोते रोते बोला। अब बच्चे के लिए नया गन्ना मंगवाया गया। बच्चा और जोर जोर से रोने लगा। उफ ! अब क्या हुआ , अकबर ने पूछा। मुझे वही गन्ना साबुत चाहिए , बच्चे ने रोते रोते गँडेरियों की ओर इशारा करते हुए कहा। यह कैसे संभव है , अकबर सोच में पड़ गया। सभी दरबारी भी बच्चे की जिद सुनकर हैरान रह गए। सभी सोच में पड़ गए कि बादशाह अब कैसे बच्चे की जिद पूरी करेंगे। भाई तुम जीते , हम हारे बीरबल , तुम सही कह रहे थे की बच्चे की जिद हमारी जिद से भी बड़ी है। अकबर ने बीरबल की बुद्धिमता का लोहा मान लिया।
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अकबर बीरबल और सबसे प्यारा बच्चा
एक बार बादशाह अकबर अपनी गोद में अपने बेटे को लेकर बैठे थे और उसे बहुत प्यार दुलार कर रहे थे। उनके आस पास उनके दरबारी बैठे थे और किसी मसले पर विचार विमर्श भी साथ साथ चल रहा था। तभी बादशाह अकबर के मन में एक विचार आया और उन्होंने दरबारियों के प्रश्न पूछ डाला कि दुनिया का सबसे प्यारा बच्चा कौन है। शहजादे हुजूर, और कौन , सभी दरबारी ऊँचे स्वर में एक साथ बोले, निश्चित रूप से शहजादे ही दुनिया के सबसे प्यारे बच्चे हैं । अकबर बहुत प्रसन्न हुए पर तभी उनकी दृष्टि बीरबल पर पड़ी जिन्होंने जवाब नहीं दिया था। क्यों बीरबल , क्या तुम्हें शहजादे का दुनिया का सबसे प्यारा बच्चा होने पर कोई शक है। नहीं नहीं हुजूर , ऐसा बिलकुल नहीं हैं , शहजादे निःसंदेह बहुत प्यारे हैं , बीरबल ने उत्तर दिया। क्या कहा , केवल बहुत प्यारे , दुनिया के सबसे प्यारे क्यों नहीं, अकबर ने कुछ तल्ख अंदाज में पूछा। हुजूर मैं आपको कुछ बताने की बजाय कुछ दिखाकर अपनी बात समझाना चाहता हूँ , पर इसके लिए आपको मेरे साथ चलना होगा, जब और जहाँ मैं ले जाऊँ। बादशाह अकबर बहुत ही सुलझे दिमाग के व्यक्ति थे। वे समझ गए की बीरबल की इस बात में भी अवश्य ही कुछ न कुछ सीखने के लिए होगा। यह सोच कर उन्होंने तुरंत हामी भर दी।शाम होते ही बीरबल अकबर को लेने के लिए आ गए। चलिए हुजूर , संसार के सबसे अच्छे बच्चे से मिलने, बीरबल ने कहा । हाँ , हाँ बीरबल जरूर चलो, कहकर बादशाह बीरबल के पीछे पीछे हो लिए। बीरबल बादशाह को ले चले , चलते चलते वो जल्दी ही नगर के बाहर निकल लिए और गाँव देहात का इलाका आ गया। सड़के टूटी थीं , गोबर की तीव्र महक आ रही थी और जहां तहां कीचड़ फैली थी। अकबर बादशाह बहुत परेशान हो रहे थे परन्तु जैसे तैसे अपने गुस्से पर काबू करके चुपचाप बीरबल के पीछे चले जा रहे थे। एक जगह जाकर बीरबल रुक गए। वहां कुछ अधनंगे बच्चे मिट्टी और गोबर में खेल रहे थे। वे पूरे मिट्टी और गोबर में सने हुए थे और उनपर से बहुत दुर्गन्ध आ रही थी। बस महाराज , पहुंच गए हम , बीरबल बोले । ये तुम हमें कहाँ ले आये बीरबल , ये तो बहुत गन्दी जगह है, अकबर ने पूछा । महाराज , यहाँ भी कुछ दुनिया के सबसे प्यारे बच्चे हैं , मैं उन्हें आपको दिखाना चाहता हूँ , बीरबल बोले। पर कहाँ है वो दुनिया सबसे प्यारे बच्चे , हमें तो कहीं नहीं दिख रहे , हमें तो केवल ये अधनंगे और बदबूदार बच्चे ही नजर आ रहे हैं , अकबर ने कहा। बस देखते जाइये हुजूर , बीरबल बोले। थोड़ी देर में जब अँधेरा बढ़ गया तो उन बच्चों के माताएं वहां आयी और अपने अपने बच्चे को अपने घर ले जाने लगीं। बच्चे और खेलने की जिद करने लगे। माताएं अपने बच्चों को को प्यार से लड़ियाने लगीं , मेरा सबसे प्यारा बेटा, सबसे अच्छा बेटा , उनका मिट्टी और गोबर से सना मुँह चूमने लगीं और उनको अत्यंत प्यार से घर ले जाने लगीं। महाराज , जाइये इन माओं से पूछिए कि दुनिया का सबसे प्यारा बच्चा कौन है। अकबर बीरबल की मंशा समझ गए। हम तुम्हारी बात समझ गए बीरबल, तुम कहना चाहते हो की हमारे शहजादे हमारे लिए दुनिया के सबसे प्यारे बच्चे हो सकते हैं पर सबके लिए नहीं , उन दरबारियों के लिए भी नहीं जिन्होंने मेरी हाँ में हाँ मिला दी ,पर यह बात तुमने मुझे वहीं क्यों नहीं बता दी, अकबर ने पुछा । बीरबल बोले , महाराज , यदि मैं आपको दरबार में ऐसा कुछ बोलता तो आप अवश्य ही क्रोधित हो जाते और मुझे सजा दे देते , इसलिए मैंने आपको समझाने का यही तरीका बेहतर जाना। धन्यवाद बीरबल , हमें एक और सबक देने के लिए , अकबर ने कहा ।
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