आधी धूप आधी छाँव
एक बार जाने बादशाह अकबर को क्या सूझी कि उन्होंने दरबारियों से पूछ लिया कि क्या कभी एक ही रास्ते पर आधी धूप और आधी छाँव हो सकती है। अकबर का सवाल सुनकर दरबारी सन्न रह गए कि यह कैसा सवाल पूछ लिया बादशाह ने , यह कैसे मुमकिन है। सभी को हैरान और निरुत्तर देखकर अकबर ने बीरबल की और रुख किया और बोले , "क्यों बीरबल , तुम्हारी क्या राय है? , क्या यह मुमकिन है। " कुछ क्षण के लिए तो बीरबल भी सोच में पड़ गया और फिर उसने बादशाह से कहा , "जी हुजूर , बिलकुल मुमकिन है। " अब हैरान होने की बारी बादशाह की थी। तो फिर ठीक है बीरबल , तुम कल महल के सामने वाले रास्ते से आधीधूप और आधी छाँव में आना , अकबर ने हुक्म दिया। और हाँ आने से पहले सूचना जरूर देना , हम खुद वो नजारा देखना चाहेंगे , अकबर ने अपना हुक्म पूरा करते हुए कहा। जी हुजूर , कहकर बीरबल चले गए। सारे दरबारी और अकबर सोचने लगे की पता नहीं अब बीरबल क्या अक्ल लगाएगा। अगले दिन बीरबल के सेवक ने दरबार में आकर बादशाह और दरबारियों के आने की सूचना दी। बादशाह समेत सभी दरबारी महल की छत पर चढ़ गए जिससे की वो दूर से ही बीरबल को आधी धूप और आधी छाँव में आते देख सकें। थोड़ी ही में दूर से बीरबल आता दिखाई दिया। सबने बड़ी ही उत्सुकता से आसमान की ओर देखा , पर वहाँ तो धूप खिली हुई थी , छाँव तो बिलकुल नहीं थी। सब हैरान थे कि इतनी धूप में बीरबल आधी धूप और आधी छाँव में कैसे आएगा। जब बीरबल पास आया तो सबने देखा कि बीरबल ने अपने सिर पे दोनों हाथों से चारपाई ( खाट ) उठाई हुई है, जिसकी रस्सियों की जालीदार बुनाई से होकर बीरबल पर लगभग बराबर मात्रा में धूप और छाँव पड़ रही है। यह दृश्य देखकर सभी लोग बीरबल की बुद्धिमत्ता का लोहा मान गए।और पढ़ें : हिंदी में अकबर बीरबल की कहानियाँ (Akbar Birbal Stories in Hindi - Part 1)
मटके में तरबूज
एक बार अकबर के दरबार में एक व्यक्ति आया। उसने अकबर को एक मटका भेंट दिया जिसका मुँह तो आकार में साधारण ही था परन्तु उस मटके में एक बड़े आकार का तरबूज रखा हुआ था जो किसी भी प्रकार से उस मटके में घुसाना संभव नहीं था। अकबर ने ध्यान से उस मटके को देखा। मटके को तोड़ कर उसमे तरबूज रखा गया हो ऐसा बिलकुल प्रतीत नहीं होता था। तो फिर यह तरबूज इस मटके में कैसे आया , यह सोचकर अकबर सहित सभी दरबारी हैरान थे। भेंट देने वाला व्यक्ति सबको हैरान देखकर बहुत प्रसन्न हो रहा था। जब किसी को कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने उसी व्यक्ति से पूछा कि उसने ऐसा कैसे किया। जवाब देने की बजाय उसने कहा की , "महाराज , मैं आपके राज्य का नहीं हूँ और मैं यह देखना चाहता हूँ की क्या आपके राज्य में कोई इतना अक्लमंद है कि ऐसा करके दिखा सके। " चुनौती सुनकर सबको बीरबल की याद हो आयी। बीरबल दरबार में प्रस्तुत हुए। उनको भी वह मटका दिखाया गया और चुनौती बताई गयी। सुनकर बीरबल ने बोला , "महाराज मैं यह कर सकता हूँ , पर मुझे छह महीने का समय चाहिए। अकबर ने तुरंत स्वीकृति दे दी। उस व्यक्ति को छह महीने बाद आने के लिए कहकर विदा किया गया। ठीक छह महीने बाद , सभी लोग दरबार में इस चुनौती को लेकर इकठ्ठा हुए। इस बार बीरबल के हाथ में ठीक वैसा ही मटका था जैसा कि उस चुनौती देने वाले व्यक्ति ने अकबर को भेंट दिया था। बीरबल के मटके में भी मटके के मुँह के आकार से बड़ा तरबूज मौजूद था। यह देखकर उस व्यक्ति ने अपनी चुनौती वापस ली और चला गया। उसके जाते ही सभी लोगों ने बीरबल को घेर लिया और पूछने लगे कि उसने ऐसा कैसे किया। बीरबल नई जवाब दिया , "यह बहुत ही साधारण काम था , तरबूज की बेल में जैसे ही एक छोटा सा तरबूज उगा , मैंने तुरंत उस पर एक मटका रख दिया। चूँकि पौधे को हवा पानी सही प्रकार से मिल रहा था तो यह तरबूज मटके के अंदर ही फलता फूलता रहा और सही समय पर , तरबूज को बेल से तोड़कर , मटके सहित मैंने आपके सामने लाकर प्रस्तुत किया।और पढ़ें : हिंदी में अकबर बीरबल की कहानियाँ (Akbar Birbal Stories in Hindi - Part 2)
जादूगर बादशाह के मन की बात जानना
एक बार अकबर के दरबार में एक जादूगर आया , जो अपने जादू से किसी के भी मन की बात जान लेता था। उसने सबको अपनी विद्या का परिचय दिया। बादशाह समेत सभी दरबारी हैरान थे। वो किसी के भी मन की बात ऐसे पढ़ लेता था जैसे किताब पढ़ रहा हो। तब वह व्यक्ति अकबर से बोला , "महाराज , मैंने सबके मन की बात पढ़कर बता दी , क्या आपके राज्य में, ऐसा कोई है जो मेरे मन की बात पढ़ कर बता सके।" जादूगर की बात सुनकर सब सोच में पड़ गए , कि अब क्या किया जाये। सब जानते थे कि इस समस्या का समाधान केवल बीरबल के ही पास है। सो बीरबल को बुलाया गया और सारी बात बताई गयी। सुनकर बीरबल सोच में पड़ गए। वे जानते थे कि उनके पास जादूगर के जादू का कोई तोड़ नहीं है , और वो जादूगर को केवल अपनी अक्लमंदी से ही हरा सकते हैं। कुछ क्षण सोचने के बाद बीरबल की आँखों में चमक दिखाई दी। बीरबल की आँखों की चमक देखकर सभी समझ गए , कि बीरबल ने कुछ उपाय अवश्य ही सोच लिया है। बीरबल जानते थे कि इस समय बादशाह अकबर की पत्नी गर्भवती थीं और बादशाह अकबर का दिमाग केवल अपनी होने वाली संतान के बारे में ही सोचता रहता था और इसके अलावा उनको कोई बात अच्छी नहीं लगती थी और जो बादशाह का ध्यान ज्यादा भटकाने की कोशिश करता था , बादशाह उसपर तुरंत नाराज हो जाते थे। बादशाह अपनी होने वाली संतान की बातों के इलावा कुछ और सुनना पसंद नहीं कर रहे थे। तो बीरबल ने इसी का फायदा उठाने की सोची। बीरबल उस जादूगर से बोले , "मान्यवर , मैं आपके मन की बात पढ़ सकता हूँ। आप सोच रहे है की भगवान की कृपा से हमारे बादशाह को एक बहुत ही सुन्दर बालक की प्राप्ति हो , जो बहुत ही कुशाग्र बुद्धि हो, बलशाली हो और भविष्य में बहुत बड़ा सम्राट बने , जिसकी कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और जो महाराज का नाम रोशन करे। " जादूगर बीरबल की बात सुनकर खुश हो गया क्योंकि वो तो कुछ और ही सोच रहा था। उसने तपाक से यह कहना चाहा , परन्तु अचानक ही वो बोलते बोलते रुक गया। वो जानता था कि बादशाह अकबर अपनी होने वाली संतान के आलावा कोई और बात सुनना नहीं चाहते और बीरबल ने वही बात बोलकर उसको फंसा लिया था। अब यदि वो ये कहता है कि वो यह नहीं सोच रहा था तो उसको दंड मिलना तय है। आखिरकार , मरता क्या न करता , उसको कहना ही पड़ा कि बीरबल ने सफलता पूर्वक उसके मन की बात पढ़ ली है। उसकी स्वीकृति सुनकर बीरबल मन ही मन मुस्कुराने लगे।और पढ़ें : हिंदी में अकबर बीरबल की कहानियाँ (Akbar Birbal Stories in Hindi - Part 4)
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