हिंदी में अकबर बीरबल की कहानियाँ (Akbar Birbal Stories in Hindi - Part 4)

Akbar Birbal Stories in Hindi - Part 4

बकरी का खा पीकर भी मोटा ना होना

एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल और अन्य खास दरबारियों के साथ बैठे खाना खा रहे थे। तभी उनकी नजर अपने दरबारियों की बढ़ती हुई तोंद की ओर गयी और उनको मजाक करने की सूझी। उन्होंने कहा , "अगर किसी को तर माल खाने को मिले तो वह अवश्य ही मोटा हो जाएगा। " यह सुनते ही दरबारी भांप गए , की बादशाह अकबर का इशारा उनकी तोंद की तरफ है। उधर बीरबल की भी तोंद कुछ समय से थोड़ी निकल आयी थी , तो उनको भी बादशाह का यह मजाक कुछ अटपटा सा लगा। बीरबल की नजरें दरबारियों से मिली तो उनकी शक्ल बता रही थी की वो बीरबल से कहना चाहते थे कि कृपया आप हमारी और अपनी बेइज्जती का बदला बादशाह से किसी प्रकार लीजिये।  बीरबल ने उन्हें आँखों में ही समझा दिया की वो निश्चित रहें। तब बीरबल बादशाह से बोले , "नहीं महाराज , ऐसा बिलकुल नहीं है , कोई तर माल खाकर मोटा हो जायेगा , ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। " बादशाह , अपनी बात बीरबल द्वारा काटे जाने से खिन्न हो गए और बोले , "बीरबल , क्या तुम यह साबित कर सकते हो ?" बीरबल बोले , "जी महाराज मैं यह बिलकुल साबित कर सकता हूँ। " बादशाह ने बगीचे में बंधी हुई बकरी की और देखते हुए कहा , "तो ठीक है बीरबल, तुम इस बकरी को ले जाओ , इसके खाने पीने के लिए तर माल का इंतजाम हम करेंगे , हमारे सैनिकों की निगरानी में तुम खुद इसे तर माल खिलाओगे , छह महीने के बाद इसका वजन करेंगे , यदि आज के वजन से ज्यादा निकला तो तुम्हारी खैर नहीं , वर्ना हम तुम्हारी बात मान जायेंगे। "

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बकरी बीरबल के घर भिजवा दी गयी। अकबर के विशेष चार सैनिक तर माल , यानि की हरे चारे के साथ साथ , काजू , बादाम , देसी घी इत्यादि लेकर बकरी के लिए लेकर पहुँच जाते। उन सैनिकों की उपस्थिति में बीरबल को वह सब बकरी को खिलाना होता। जब बकरी पेट  खा चुकी होती होती तभी वो सैनिक वहाँ से लौटते। इस प्रकार छह महीने भी बीत गए और वह दिन भी आ पहुंचा जब बीरबल को उस बकरी को लेकर दरबार में उपस्थित होना था। बीरबल उस बकरी को दरबार में लेकर आ गए।  बकरी का वजन किया गया , पर ये क्या बकरी का वजन तो पहले से काफी घट गया था।  सभी दरबारियों ने चैन की साँस ली। अकबर यह देखकर हैरान थे और बोले , "भई बीरबल , तुम्हें मानना पड़ेगा। आखिर हम हारे तुम जीते , पर यह तो बताओ कि तुमने यह किया कैसे।

बीरबल बोले , "बहुत सरल था महाराज , जहाँ आपका मानना था की तर माल खाने से किसी की तोंद निकल आती है , वहीं मेरा मानना था , सेहत में सुधर केवल बेफिक्री के खाने से ही आता है। आपके सैनिकों के सामने तर माल खिलने के बाद , मैं इस बकरी को चिड़ियाघर में शेर के पिंजरे से बाँध आता था। जहाँ शेर पिंजरे में होने की वजह से इसे खा तो नहीं पाता था पर इस पर बार बार झपटता रहता था। शेर के बार बार इस पर झपटने से यह सारी रात बिना सोये , बहुत डरी सहमी रहती थी, जिसके कारण ये मोटी होने के बजाय दुबली होती गयी।" अकबर समझ गए कि एक बार फिर बीरबल ने उनको अपनी बुद्धि मता का परिचय दे दिया है। अकबर यह सोच ही रहे थे तभी बीरबल ने कहा , "गुस्ताखी माफ़ जहाँपनाह , पर तोंद तो आपकी भी निकल आयी है। "
बीरबल की बात सुनकर सभी दरबारी मन ही मन , मुस्कुराने लगेऔर बादशाह अकबर कहकहा लगाकर हंसने लगे।

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कलाकार की असली भाषा पहचानना 

एक बार अकबर के दरबार में एक कलाकार व्यक्ति आया। वो सभी भाषाओं में पारंगत था । उसने चुनौती दी कि अकबर के दरबार में कोई उसकी मातृभाषा का पता चला के बताए। चूँकि अकबर का साम्राज्य भारत के बहुत बड़े भूभाग में फैला हुआ था , इसलिए उसके दरबार में हर भाषा जानने वाले दरबारी थे। सभी दरबारियों ने उससे अपनी अपनी भाषा में बात की , यह जानने के लिए की उसकी असली भाषा क्या है , पर वह सभी भाषाओं में इतना पारंगत था की सभी भाषाएँ उसकी मातृभाषा लगती थीं।आखिर में सबकी नजरें बीरबल पर जम गयीं। सब देखना चाहते थे की बीरबल इस चुनौती का सामना कैसे करता है। बीरबल ने कहा , "मान्यवर , मैं आपकी मातृभाषा का पता लगा सकता हूँ , परन्तु इसके लिए आपको महल में एक रात के लिए रुकना पड़ेगा। कलाकार ने बीरबल की शर्त स्वीकार कर ली। बीरबल ने जानबूझकर उसे सीढ़ियों के पास पहली मंजिल पर रुकने के लिए कमरा दिया। रात को जब वह व्यक्ति पेशाब करने के लिए उठा और जैसे ही सीढ़ियों के पास से गुजरा , वहीं अँधेरे में छुपे बीरबल ने उसे धक्का दे दिया। वह व्यक्ति संभल नहीं पाया और सीढ़ियों से नीचे गिर पड़ा और गिरते गिरते उसके मुँह से उड़िया भाषा में निकला, "उई माँ , मर गया ।" बीरबल तो बस इसी क्षण की प्रतीक्षा में था। उसने तुरंत वहाँ रौशनी कर दी और वहीं छुपे बैठे भाषा विशेषज्ञों की ओर देखा। उनमें से एक विशेषज्ञ बीरबल से बोला , "मान्यवर , यह भाषा निश्चित रूप से उड़िया है , जिसमें इन्होने , उई माँ , मर गया बोला है। " आगे बीरबल को कुछ कहने की जरुरत ही नहीं पड़ी। कलाकार समझ गया की बीरबल ने चतुराई पूर्वक उसकी मातृभाषा पता कर ली है। मुसीबत पड़ने पर इंसान के मुँह से सहज ही मातृभाषा निकल पड़ती है। वही कलाकार के साथ भी हुआ , जब बीरबल के धक्का देने से वह सीढ़ियों से गिरा।

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चमड़ा बिछवाना

एक बार अकबर के शहजादे के पैर में कांटा चुभ गया और खून बहने लगा। शहजादे के पैर से खून बहता देखकर , अकबर के गुस्से की कोई सीमा न रही। उसने गुस्से से पूछा , ये कैसे हुआ। कर्मचारी ने उसको बताया की शहजादे महल के बगीचे में खेल रहे थे जब उनको कांटा चुभ गया। सुनते ही अकबर आग बबूला हो गया। उसने तुरंत महल के सभी बगीचों से घास हटाकर चमड़ा बिछवाने का आदेश दे दिया। सभी दरबारी सन्न रह गए। महल के  बगीचों में चमड़ा बिछवाने का मतलब था हजारों बेजुबान जानवरों का क़त्ल। पर अकबर को कौन समझाए। तभी बीरबल आगे बढ़े। उन्होंने बादशाह को एक जोड़ी चमड़े के जूते भेंट देते हुए कहा , "महाराज , यदि आप शहजादे को ये चमड़े के जूते पहना दें तो यह भी सारे  बगीचों में चमड़ा बिछाने के बराबर ही होगा। " सभी दरबारी सोचने लगे की अब अवश्य ही बादशाह अकबर अपने आदेश के खिलाफ बीरबल की सलाह सुनकर और ज्यादा गुस्सा हो जाएंगे और शायद बीरबल को दंड भी दे दें। पर दिल से सभी यह दुआ कर रहे थे कि काश बादशाह बीरबल की सलाह मान लें। शायद सभी की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और अकबर को बीरबल की सलाह बड़ी नेक लगी।  उसने वो जूते शहजादे के पास भिजवा दिया और अपना आदेश वापस ले लिए।  सभी दरबारियों ने चैन की सांस ली।


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