हिंदी कहानी - कढ़ाई ने बच्चा पैदा किया (Hindi Story - Fry Pan Gave Birth To Fry Pan)

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एक शहर में रामलाल और दीनानाथ नाम के दो पडोसी रहा करते थे। जिस प्रकार लोग कोई चीज कम पड़ने पर अपने पडोसी से मांग लेते हैं वैसे वो भी आवश्यकता पड़ने पर एक दूसरे से घरेलू चीजें माँग लिया करते थे। एक दिन रामलाल के घर कुछ मेहमान आने वाले थे।  मेहमानों की संख्या कुछ अधिक थी और उसके पास पूरियां तलने के लिए कढ़ाई नहीं थी , तो वो पहुँच गया दीनानाथ के घर कढ़ाई मांगने। अपनी आवश्यकता बताते हुए उसने दीनानाथ से केवल दो दिन के लिए कढ़ाई मांगी। दीनानाथ ने सहर्ष ही उसको कढ़ाई दे दी और साथ में मेहमानों की आव भगत में जरुरत पड़ने पर कुछ भी सहायता बेझिझक मांगने की सलाह भी दी। रामलाल कढ़ाई लेकर धन्यवाद देकर चला गया।

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रामलाल को कढ़ाई ले जाकर एक सप्ताह से ऊपर हो चुका था , परन्तु अभी तक वो कढ़ाई लौटने नहीं आया था। हो सकता है की मेहमान कुछ अधिक दिन ठहर गए हों या काम की अधिकता की वजह से रामलाल को कढ़ाई लौटने का समय ही ना मिला हो , यह सोचकर दीनानाथ ने भी थोड़ा और इंतजार करना ठीक समझा। वैसे भी उसे कढ़ाई की कोई खड़े पैर तो आवश्यकता तो थी नहीं। दीनानाथ इसी उधेड़बुन में था कि तभी दरवाजे की घंटी बज उठी। उसने जाकर देखा तो सामने दरवाजे पर रामलाल उसकी कढ़ाई हाथ में लिए खड़ा था और उसके पास साथ में एक छोटी सी कढ़ाई और भी थी। रामलाल ने दीनानाथ को उसकी कढ़ाई धन्यवाद देकर कढ़ाई लौटाई और साथ में एक छोटी कढ़ाई भी उसे दी। दीनानाथ हैरान था , ये छोटी कढ़ाई किसलिए। अरे मैं तो तुम्हें बताना ही भूल गया , तुम्हारी कढ़ाई ने बच्चा पैदा किया है , रामलाल बोला। "बच्चा पैदा किया है ?", दीनानाथ हैरान होते हुए बड़बड़ाया। रामलाल ने अपनी बात जारी रखी , अरे मित्र इसमें हैरान होने की क्या बात है , तुम्हारी कढ़ाई तो पहले से ही गर्भवती थी। मेहमानों के जाने के बाद तुरंत बाद ही इसने बच्चे को जन्म दे दिया था।  वो तो थोड़ी इसकी और बच्चे की तबियत ख़राब हो गयी थी , इस वजह से आप को लौटने में थोड़ा समय लग गया। अब चूँकि कढ़ाई तुम्हारी है तो उसका बच्चा भी तुम्हारा हुआ ना , लो सम्भालो अपनी धरोहर। दीनानाथ जानता था की कढ़ाई बच्चा पैदा नहीं कर सकती , परन्तु लालच उसके मन में घर कर चुका था। उसने मुस्कुराते हुए कढ़ाई और उसका बच्चा स्वीकार कर लिए।

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कुछ हफ्ते बीते ही थे की रामलाल के घर फिर मेहमानों का आना हुआ। अबकी बार उसे कुकर (pressure cooker) की आवश्यकता पड़ी। वह आ गया दीनानाथ के घर कुकर मांगने। रामलाल की आवश्यकता सुनकर दीनानाथ ने सहर्ष ही उसको कुकर दे दिया। ऊपर से तो दीनानाथ दिखा रहा था की रामलाल की सहायता कर के उसे बहुत ख़ुशी हो रही है परन्तु अंदर ही अंदर वह अपने लालची मन में सोच रहा था कि क्या पता इस बार कुकर भी बच्चा पैदा कर दे। रामलाल दो दिन में लौटने की कहकर कुकर लेकर चला गया।

एक सप्ताह पश्चात् भी जब रामलाल कुकर लौटने नहीं आया तो लालची दीनानाथ को चिंता की बजाय प्रसन्नता हुई। उसने सोचा कि शायद इस बार कुकर ने भी बच्चा पैदा किया होगा इसीलिए रामलाल को कुकर लौटने में देर लग रही है।  यह विचार मन में आते ही उसने थोड़ा और इंतजार करने का निर्णय लिया। एक सप्ताह और बीत गया।  दीनानाथ ने सोचा कि शायद कुकर और उसके बच्चे की तबियत थोड़ी ज्यादा खराब होगी, तो क्यों ना वह खुद जाकर कुकर और उसके बच्चे को ले आए। यह विचार आते ही वह चल पड़ा रामलाल के घर की ओर।  पहुंचकर उसने रामलाल के घर का दरवाजा खटखटा दिया। रामलाल बाहर आया और दीनानाथ को देखकर रोने लगा। रामलाल ने उसे सांत्वना दी और रोने का कारण पूछा। क्या बताऊँ मित्र , तुम्हारा कुकर तो मर गया।  "मर गया मतलब ", दीनानाथ ने हैरानी भरे गुस्से से पूछा। तुम्हारा कुकर चल बसा मित्र, वह स्वर्ग सिधार गया , अब इस दुनिया में नहीं है, रामलाल ने कहा।  दरअसल वह काफी बीमार था जब मैं उसे तुम्हारे घर से लाया था।  मैंने उसका काफी इलाज भी कराया , परंतु होनी को कौन टाल सकता है , भगवान के आगे किसका बस चला है , रामलाल दुखी होते हुए बोला।

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दीनानाथ का क्रोध के मारे बुरा हाल था। भला कुकर भी कभी मरते हैं ? , दीनानाथ ने क्रोधित होते हुए पूछा।  क्यों नहीं मित्र , जब कढ़ाई बच्चा पैदा कर सकती है तो कुकर क्यों नहीं मर सकता। दीनानाथ समझ गया कि वह अपने लालच के चक्कर में अपने पड़ोसी की चाल में फंस गया।

मित्रो , इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि , "लालच बुरी बला है।"


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