हिंदी कहानी - तीस मार खां (Hindi Story - Tees Mar Kha)

एक गांव में एक बहुत ही निकम्मा आदमी रहा करता था। वह कुछ काम धाम तो किया नहीं करता था बस मुफ्त की रोटियां तोड़ा करता था। उसकी माँ उसके इस निकम्मेपन से बहुत दुखी थी और हमेशा उसे डांटती फटकारती थी और काम करने के लिए कहती थी पर उसके कान पर जूँ भी नहीं रेंगती थी। एक बार वह एक हलवाई के पास बैठा था। वहां बहुत मक्खियाँ थीं। खाली बैठे बैठे उसने तीस मक्खियाँ ही मार डालीं और सबको कहने लगा कि , "मैंने तीस मार दिए" और अपने आप को तीस मार खां कहने लगा। लोगों को लगा कि पता नहीं शायद इसने तीस मार दिए होंगे इसीलिए कह रहा है , तो लोग भी उसको तीस मार खां कहने लगे।

एक बार तीस मार खां की माँ से उसका निकम्मापन सहन नहीं हुआ तो उसने तीस मार खां को चार रोटी बनाकर पोटली में बांधकर दीं और घर से निकल जाने के लिए कहा और तब तक वापस ना आने के लिए हिदायत दी जब तक कि वो कमाने धमाने ना लगे। बेचारा तीस मार खां क्या करता , चुपचाप रोटियां लेकर घर से निकल पड़ा। लेकिन माँ और तीस मार खां, दोनों को ही ना पता था की रोटियां बनाते समय आटे में एक छिपकली गिर गयी थी और आटा जहरीला हो गया था ।

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रास्ते में एक हाथी पागल हो गया था। लोग डर के मारे इधर उधर भाग रहे थे। राजा के सैनिक जो हाथी को वश में करना चाहते थे थोड़ा पीछे छूट चुके थे। तीस मार खां को रास्ते में खड़ा देख हाथी तीस मार खां के पीछे लपका। हाथी को अपनी ओर आता देखकर तीस मार खां दुम दबा कर भागा। उसके हाथ से रोटियों की पोटली वहीं छूट गयी। हाथी ने रोटियां खा लीं। रोटियों का आटा जहरीला होने की वजह से हाथी बेहोश हो गया। तीस मार खां समझ गया की रोटियों में कुछ गड़बड़ थी। वह हाथी के पास आया और उसे घूँसे मारने शुरू कर दिए और साथ साथ कहने लगा , "दुष्ट हाथी तेरी यह हिम्मत की तूने तीस मार खां से पंगा लिया , तू जानता नहीं मेरा नाम तीस मार खां है "। इतने में लोग घर से बाहर निकल आये और राजा के सैनिक भी आ गए। सब यह देखकर हैरान थे कि निहत्थे तीस मार खां ने घूसे मरकर ही हाथी को गिरा दिया।  इससे पहले की हाथी को होश आये सैनिकों ने उसे बाँध दिया। तीस मार खां की जय जय कार हो उठी। जब यह खबर राजा के पास पहंची तो राजा ने उसे बुलाकर सम्मानित किया और इनाम दिया।

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कुछ दिनों के बाद राज्य में एक आदमखोर शेर का आतंक छा गया।  राजा ने तुरंत तीस मार खां को बुला भेजा और तीस मार खां से उस आदमखोर शेर को पकड़ने के लिए कहा। सफल होने पर अच्छे इनाम का वादा किया और असफल होने की सूरत में कड़ी सजा देने की बात कही।  सजा की बात सुनकर तीस मार खां  का चेहरा उतर गया। सजा के बारे में सोचते सोचते बुझे मन से वह घर की ओर चल दिया।  गांव के पास पहुंचते पहुंचते रात हो गयी।  अभी भी गांव कुछ मील दूर ही था की बारिश होने लगी। उसने सोचा क्यों ना पास वाले गांव के कालू कुम्हार के घर से गधा ले लिया जाये। इससे वो जल्दी घर पहुंच जायेगा और सुबह गधा वापस कर देगा। यह सोच वह कालू कुम्हार के घर की ओर चल पड़ा। बड़ा घना अँधेरा था , हाथ को हाथ सुझाई ना देता था। उधर बारिश से बचने के लिए शेर ने भी कालू कुम्हार के छज्जे के नीचे शरण ली। अंदर कालू कुम्हार की पत्नी कालू कुम्हार से कह रही थी की उसे राज्य में आदमखोर शेर के आने से बहुत डर लग रहा है।  कालू कुम्हार बोला , "भागवान , टपका (बारिश) आ गया है , मुझे शेर का नहीं टपके का डर ज्यादा है। यदि टपका आ गया तो सब गड़बड़ हो जाएगी।" यह सुनकर शेर के कान खड़े हो गए।  वो सोचने लगा कि यह टपका कौन है जिससे कुम्हार शेर से भी ज्यादा डर रहा है।  अवश्य ही यह कोई बहुत खतरनाक चीज है। तभी तीस मार खां कुम्हार के घर के बाहर पहुंच गया और अँधेरे में गधे जैसी कोई आकृति (शेर) उसे घर के बाहर ही खड़ी दिखी। अब इतनी रात को कुम्हार को क्या परेशान करुँ , बिना पूछे ही उसका गधा ले चलता हूँ , सुबह आकर लौटा दूंगा , यह सोचकर वह शेर पर बैठ गया और और उसके कान उमेठते हुए उसे चलने के लिए हकालने लगा।  शेर ने सोचा अवश्य ही टपका आ गया।  डर के मारे शेर भीगी बिल्ली की तरह चलने लगा। गांव पहुंचते पहुंचते तक बारिश रुक गयी। रात बहुत हो चुकी है , अब माँ को क्या परेशान करना , यहीं बाहर ही सो जाता हूँ , यही सोचकर तीस मार खां ने वही घर के बाहर ही शेर को बाँध दिया और उसका तकिया लगाकर सो गया। तीस मार खां को टपका समझकर शेर भी डर के मारे चुप चाप ही रहा। सुबह जब लोगों ने शेर को पेड़ से बंधे देखा और तीस मार खां को उसका सहारा लेकर सोते देखा तो वो तीस मर खां की जय जय कार करने लगे।  शोर से तीस मार खां और शेर दोनों की नींद खुल गयी।  शेर ने टपके की जगह एक इंसान को देखा तो दहाड़ने लगा।  तीस मार खां दहाड़ सुनकर उछलकर शेर से दूर हो गया और सारा मामला समझते ही डींग हांकने लगा , "देखो अपने आप को शेर समझता है, मैंने कैसे गधे की तरह इसे बांध रखा है। " जब ये बात राजा को पता चली तो उसने तीस मार खां बहुत सारा धन इनाम में दिया।

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कुछ समय के बाद पडोसी राज्य ने उस राज्य पर आक्रमण कर दिया। शत्रु सेना बहुत बड़ी और ताकतवर थी। हार निश्चित थी।  राजा ने घबराकर तीस मार खां को बुला भेजा और उसको शत्रु सेना के साथ युद्ध करने के लिए अपनी सेना का सेनापति घोषित कर दिया। राजा ने घोषणा कर दी कि यदि तीस मार खां ने यह युद्ध जितवा दिया तो वह उसको अपना आधा राज्य दे देगा और अपनी बेटी से उसका विवाह कर देगा।  परन्तु तीस मार खां का तो डर के मारे बुरा हाल था। उसने तो कभी तलवार भी नहीं पकड़ी थी। वो ऐसा सोच ही रहा था की कर्मचारियों ने उसको युद्ध के पोषक पहना दी और उसको अस्त्र शस्त्र पकड़ा दिए। राजा स्वयं तीस मार खां को अस्तबल ले गया और उससे अपनी मर्जी का घोड़ा चुनने के लिए कहा। तीस मार खां चाहता था कि वो युद्ध में सबसे पीछे रहे और मौका देखकर इधर उधर निकल ले।  इसलिए उसने सबसे मरियल और एक टांग से लंगड़े घोड़े को चुना।  राजा प्रसन्न हो उठा।  राजा बोला , "तीस मार खां , मुझे तुमसे यही उम्मीद थी। यह हमारा सबसे अच्छा घोडा है और युद्ध जीतने से पहले यह हार नहीं मानेगा।" तीस मार खां अपनी किस्मत पर मन ही मन रो ही रहा था कि  सैनिकों ने उसको घोड़े पर बिठा दिया और युद्ध का बिगुल बजा दिया।  युद्ध का बिगुल बजते ही तीस मार खां का घोड़ा हवा से बातें करने लगा।  घोड़ा इतनी तेज दौड़ा की तीस मार खां की सेना काफी पीछे छूट गयी। तीस मार खां को लगा कि यही सही समय है मैं चुपचाप घोड़े से उतरकर कहीं भाग जाता हूँ , कोई मुझे नहीं देख रहा है। उसने लगाम खीचीं , पर यह क्या , घोड़ा तो रुका ही नहीं , बल्कि उसकी गति बढ़ गयी। तीस मार खां के हाथ पाँव फूल गए। उसने और कोशिश की तो घोड़े की गति और बढ़ गयी। तीस मार खां ने हाथ जोड़कर घोड़े से विनती की कि मेरे प्यारे घोड़े , मेरे बाप , मेरे अच्छे बेटे , मेरे दोस्त , मेरे भाई रुक जा। पर हर प्रार्थना के साथ ही घोडा और तेज भागने लगता।  अब तो सामने शत्रु की सेना भी दिखने लग गयी थी। आखिरकार तीस मार खां ने अपने दाएं हाथ से एक पेड़ पकड़ लिया , पर ये क्या , घोड़े की गति से पेड़ टूट कर उसके हाथ में आ गया।  उसने जल्दी से बाएं हाथ से एक पेड़ पकड़ा तो वह भी उसके हाथ में आ गया। घोड़े की गति टस से मस न हुई। घबराकर उनसे अपने दोनों पैर रास्ते के खम्बों में अटका लिए तो खम्बे भी उखाड़कर उसके पैरों में अटक गए। घोडा बदस्तूर भागा जा रहा था। अब तो शत्रु सेना एकदम सामने आ चुकी थी। जब शत्रु सेना ने देखा कि एक आदमी अपने दोनों हाथों में दो पेड़ और अपने दोनों पैरों में दो खम्बे लिए उनपर बड़ी ही तेज गति से आक्रमण करने आ रहा है तो वह घबरा गयी।  शत्रुओं ने सोचा कि जब एक आदमी इतना बलशाली है तो बाकी सेना कितनी ताकतवर होगी और यह सोचकर शत्रु सेना भाग खड़ी हुई। इतने में तीस मार खां की सेना भी आ गयी। उन्होंने जब तीस मार खां के दोनों हाथों में दो पेड़ और दोनों पैरों में दो खम्बे देखे और शत्रु सेना को दुम दबाकर भागते देखा तो उन्होंने तीस मार खां की जय जय कार करनी शुरू कर दी। राजा ने अपने वचन के अनुसार तीस मार खां को अपना आधा राज्य दिया और अपनी बेटी से उसकी शादी कर दी।

इसे कहते हैं :

Khuda Meharban To Gadha Pehalwan


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