हिन्दू धर्म की 10 विशेषताएं (10 Unique Things About Hinduism)

Hinduism

1. हिन्दू धर्म सबसे पुराना धर्म है

बाकी प्राचीन धर्म जहां आधुनिक धर्मों के आगे टिक नहीं पाए वही हमारा हिन्दू धर्म अपने मूर्त रूप में आज भी लगभग वैसे के वैसे कायम हैं। आज भी हिन्दू धर्म में पूजा की वही पद्यतियाँ और जीवन जीने की वही मन्यताऐ हैं जो आज से हजारों साल पहले थी। जहां इतिहास में आक्रांताओं ने बहुत सारे देश की धर्म और संस्कृति को बिलकुल ही बदल दिया , वही भारत में आकर वो भी नहीं समझ पाए की क्या करें क्योंकि यहाँ उनका सामना एक ऐसे धर्म से हुआ जिसमें एक से अधिक भगवान , करोड़ों देवी देवता , अनेको पंथ संप्रदाय और अनगिनत मान्यताएँ थीं। हजारों सालों के वैज्ञानिक और वैचारिक बदलावों को अपने में समेटते हुए हिन्दू धर्म आज भी वैसे ही कायम है।


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2. हिन्दू धर्म में एक से अधिक भगवान और करोड़ों देवी देवता हैं।

जहाँ आधुनिक धर्म एक ही भगवान और एक ही तरह की पूजा पद्यति पर जोर देते हैं वहीं हिन्दू धर्म में हर आदमी अपना भगवान चुनने के लिए स्वतंत्र है। तुलसीदास जी ने लिखा है "जाकी रही भावना जैसी , प्रभु मूरत देखि तिन वैसी", इसका मतलब है जो भगवान के प्रति जैसी भावना रखता है , भगवान उसे उसी रूप में दिखाई देते हैं । और मजे की बात है सब हिन्दू सभी भगवानों को बराबर मानते हैं , क्योंकि उनको पता है कि सभी एक ही हैं। उदाहरण के लिए मैं हनुमान जी का परम भक्त हूँ परन्तु मैं दुर्गा माता , शिवजी , राम जी , कृष्ण जी आदि को भी उतना ही मानता हूँ जितना कि हनुमान जी को , है न आश्चर्य की बात। यहाँ एक घर से दुसरे घर में अलग अलग भगवान की मूर्ति देखने को आसानी से मिल सकती है , अलग अलग पूजा के तरीके हो सकते हैं पर सभी भगवानों के प्रति भावनाएं एक जैसी ही मिलेंगी।


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3. हिन्दू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है।

जहाँ बाकि धर्मों में उसके संस्थापक का नाम और उसका जन्म दिन आसानी से बताया जा सकता है , वही हिन्दू धर्म में किसी को भी नहीं मालूम की हिन्दू धर्म की शुरुआत किसने की। यदि ब्रह्मा , विष्णु और शिवजी को इस धर्म का सबसे बड़ा भगवान मान लें , तो किसी को नहीं मालूम की ब्रह्मा जी , विष्णु जी और शिवजी का जनम कब हुआ।


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4. हिन्दू धर्म , स्त्री शक्ति की पूजा करने वाला संसार का एकमात्र बड़ा धर्म है।

हिन्दू धर्म संसार का एकमात्र धर्म है जहाँ देवताओं और भगवानों के साथ देवियों की भी पूजा की जाती है। क्यों ना हो , भारत की तो संस्कृति में ही है , "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:", यानि कि जहाँ स्त्री की पूजा होती है वहीं देवता रहते है। और ये कहानी तो सबने सुनी ही होगी कि जब शिवजी ने गणेश जी का सिर काट दिया था तब पार्वती जी के गुस्से के सामने किसी भगवान या देवता की नहीं चली थी और पार्वती जी का क्रोध शांत करने के लिए शिवजी को कैसे गणेश जी के धड़ के साथ हाथी के बच्चे का सिर जोड़ना पड़ा था। फिर हमें धन भी तो देवी लक्ष्मी से और विद्या, देवी सरस्वती से ही मिलती है।


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5. हिन्दू धर्म अपने सबसे प्रचलित भगवानों से भी पुराना है।

तो मित्रो , हिन्दू धर्म की पांचवी बड़ी विशेषता है कि , यह धर्म अपने सबसे प्रचलित भगवानों के जन्म से भी अधिक पुराना है। राम , कृष्ण और हनुमान जी हिन्दू धर्म में सबसे प्रचलित भगवानों में से हैं। इन तीनों का जन्म दिवस भी लोगों को मालूम (हां वर्ष भले ही ना मालूम हो), लेकिन ये सब जब भी धरती पर अवतार लेकर आए , हिन्दू धर्म पहले से मौजूद था यानि कि इतने बड़े भगवानों ने भी हिन्दू धर्म की शुरुआत नहीं की बल्कि वे तो खुद हिन्दू धर्म में पैदा हुए।


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6. हिन्दू धर्म में कोई नहीं जानता की हिन्दू धर्म में सबसे परम शक्तिशाली भगवान कौन  है।

यह हिन्दू धर्म एक और विशेषता है। कुछ लोग मानते हैं की विष्णु जी सबसे बड़े है तो कुछ लोग शिवजी को सबसे बड़ा मानते हैं। कुछ लोग विष्णु और शिव को बराबर मानते हैं तो कुछ लोग वेदों के अनुसार ब्रह्म को सबसे बड़ा मानते हैं।  कुछ लोग ओम को सबसे बड़ा मानते हैं तो कुछ आदिशक्ति या दुर्गा माता को। सबकी अपनी अपनी मान्यता है। सबसे अच्छी बात यह है की कोई किसी भी भगवान को बड़ा माने लेकिन वो दूसरे भगवान को छोटा भी नहीं मानता। उदहारण के लिए विष्णु जी को बड़ा मानने वाला कभी भी शिवजी को छोटा नहीं बोलेगा , बल्कि वो शिवजी को भी उतना ही शक्तिशाली मानेगा जितना की विष्णु जी को।


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7. हिन्दू धर्म में भगवान स्वयं धरती पर अवतार लेकर आते है।

संसार के बड़े धर्मों में केवल हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है , जिसमें भगवान बार बार धरती पर स्वयं आते है। कभी राम और कृष्ण के रूप में वे मानव जन्म लेते हैं और धरती को पापियों के अत्याचारों से मुक्त करते हैं तो कभी वे मीरा जैसे भक्तों की पुकार सुनकर अपने असल रूप में ही प्रकट हो जाते है।


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8. हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद भी जीवन है।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार यह शरीर कुछ भी नहीं और आत्मा ही सबकुछ है। अपने कर्मों के अनुसार आत्मा तब तक विभिन्न योनियों में जन्म लेती रहती है जब तक की अपने अच्छे कर्मों के कारण उसे मोक्ष प्राप्त नहीं हो जाता। आत्मा के इस प्रकार जन्म लेने को हिन्दू धर्म में पुनर्जन्म कहा गया है और यह केवल हिन्दू धर्म एवं इससे निकले और धर्मों की ही विशेषता है। हिन्दू धर्म के अनुसार आत्मा अजर और अमर है। इसीलिए हम लोग साल में एक बार श्राद्ध करते हैं , जिसमें हम, जो लोग देह त्याग चुके हैं , यानि कि मर चुके हैं उनको भोजन कराते है , क्योंकि हम मानते हैं कि भले ही वे लोग इस जीवन से जा चुके हैं परन्तु अपने कर्मों के अनुसार किसी दूसरी योनि में वे जन्म ले चुके हैं।


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9. हिन्दू धर्म में गाय की पूजा होती है।

जी हाँ मित्रों , ना केवल गाय बल्कि सभी पशुओं को हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है और ऐसा इसलिए क्योंकि हम लोग मानते हैं की जानवरों के अंदर भी वही आत्मा वास करती है जो हमारे अंदर है और शरीर तो मात्र इस जन्म के कर्तव्यों के निर्वाहन का साधन मात्र है। इसी कारण से आज भी भारत की बहुत बड़ी आबादी शाकाहारी है। और गाय को पवित्र मानते के पीछे कारण यह है कि हम गाय का दूध पीते हैं इसलिए गाय हमारे लिए माँ सामान होती है। गाय ही नहीं हम उन सभी चीजों की पूजा करते हैं जो हमें कुछ ना कुछ देते हैं , जैसे कि हम सूरज को भगवान मानते है क्योंकि सूर्य से हमें ऊर्जा मिलती हैं इसीलिए जीवनदायी जल देने वाली नदियों और फल एवं छाया देने वाले वृक्षों की भी हम पूजा करते हैं।


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10. हिन्दू धर्म , एक धर्म ना होकर जीवन जीने का तरीका है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी हिन्दू धर्म की परिभाषा एक धर्म के रूप में ना करके , "Way of Life", यानि कि जीवन पद्यति के रूप में की है। जी  हाँ , वास्तव में हिन्दू धर्म नाम को कोई धरम नहीं है। हिन्दू शब्द तो मध्य एशिया के लोगों ने भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगों की अलग जीवन शैली को दिया है जिसे हमने अपनी बाकी धर्मों से अलग पहचान बनाने के लिए अपना लिया है। वास्तव में हमने अपनी जीवन शैली को कभी धर्म नहीं माना और यदि हमारी जीवन शैली को कोई नाम देना ही है तो सनातन" शब्द अधिक सही रहेगा। वैसे भी अंग्रेजी शब्द रिलिजन (Religion) का हिंदी अथवा संस्कृत कोई समानांतर शब्द नहीं होता है। जो लोग रिलिजन (Religion) का हिंदी मतलब धर्म मानते हैं , वे पूरी तरह ठीक नहीं हैं क्योंकि रिलिजन (Religion) का मतलब होता है एक प्रकार के भगवान और एक प्रकार की पूजा पद्यति को मानना , जबकि हिंदी शब्द धर्म का मतलब होता है ड्यूटी (Duty) यानि कि कर्त्तव्य।

यूनान , मिस्र , रोम सब मिट गए जहाँ से ,
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।


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